फ़िल्म समीक्षा: धुरंधर- द रिवेंज

धुरंधर- द रिवेंज 

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आदित्य धर के निर्देशन में बनी धुरंधर– द रिवेंज एक बड़े स्केल की एक्शन-ड्रामा फिल्म है, जो अपने दमदार प्रेजेंटेशन, इंटेंस अभिनय और मजबूत बैकग्राउंड स्कोर के कारण चर्चा में है। फिल्म में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में नजर आते हैं। यह फिल्म पूरी तरह से डायरेक्टर आदित्य धर के विजन को दर्शाती है। हर फ्रेम में उनका आत्मविश्वास और सिनेमाई दृष्टिकोण साफ दिखाई देता है। डायलॉग्स में वजन है, बैकग्राउंड म्यूजिक प्रभावशाली है और स्क्रीन ट्रीटमेंट इसे एक मजबूत सिनेमाई अनुभव बनाता है।
अभिनय
रणवीर सिंह ने अपने करियर के बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक दिया है। उन्होंने दर्द, पीड़ा, देशभक्ति, आक्रोश और आत्मग्लानि जैसे जटिल भावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। रणवीर सिंह ने धुरंधर में जो अभिनय किया है, वो सिर्फ अच्छा नहीं बल्कि करियर बेस्ट कहा जा सकता है। अगर बारीकी से देखें तो उन्होंने इस फिल्म में चार अलग-अलग लुक्स और व्यक्तित्व को जिया है और हर किरदार में इमोशंस की जो रेंज दिखाई है, वो असाधारण है। अर्जुन रामपाल का किरदार अपेक्षाकृत कमजोर लगता है। संजय दत्त प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। आर माधवन का रोल छोटा लेकिन असरदार है। राकेश बेदी एक बार फिर अपनी छाप छोड़ते हैं।
कहानी और थीम
फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित एक काल्पनिक कथा पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रवाद प्रमुख रूप से प्रस्तुत किया गया है। आदित्य धर ने इस फिल्म के जरिए यह दिखाने की कोशिश की है कि हिंदी सिनेमा भी बड़े विजन और स्केल पर खड़ा हो सकता है—और इसमें वे काफी हद तक सफल भी रहे हैं।
तकनीकी पहलू
बीजीएम / बैकग्राउंड म्यूजिक: फिल्म की सबसे बड़ी खासियत।
संवाद: बेहतरीन।
लोकेशन और सिनेमैटोग्राफी: रियल लोकेशन, विजुअल्स अच्छे हैं।
गाने: बकग्राउंड में चलते हैं जो कहानी के फ़्लो में फिट हैं।
फिल्म की कमियां
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी लंबाई है, जिसे लगभग 15–20 मिनट तक कम किया जा सकता था। फिल्म की लंबाई करीब 3 घंटे उनचास मिनट है। इसके अलावा, कुछ दृश्यों में जरूरत से ज्यादा हिंसा भी देखने को मिलती है। हालांकि, फिल्म के एडल्ट टोन को देखते हुए यह पूरी तरह अनुचित भी नहीं लगता।
देखें या न देखें
धुरंधर – द रिवेंज मास्टरपीस तो नहीं है, लेकिन एक दमदार, एंटरटेनिंग और बड़े कैनवास पर बनी फिल्म है। यदि आप भव्य और इंटेंस सिनेमा पसंद करते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। ~गोविन्द परिहार (20.03.26)

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