फ़िल्म समीक्षा: तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी
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तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी ⭐⭐1/2
कहानी / प्लॉट
रेहान (कार्तिक आर्यन) एक बड़ा वेडिंग प्लानर है, जो अपनी माँ (नीना गुप्ता) के साथ अमेरिका में रहता है। क्रोएशिया ट्रिप के दौरान रेहान की मुलाकात रूमी (अनन्या पांडे) से होती है, जो एक लेखक है। शुरू में दोनों के बीच नोक-झोंक होती है, फिर प्यार हो जाता है।
रूमी की छोटी बहन की शादी के कारण और पिता (जैकी श्रॉफ) की नींद में चलने की बीमारी की वजह से कहानी में मैलोड्रामा जुड़ता है। फिल्म का अंत एक सोशल मैसेज के साथ होता है, जो मॉडर्न सोच को दर्शाने की कोशिश करता है।
अभिनय और पात्र
कार्तिक आर्यन: लगातार वही स्टाइल में परफॉर्म करते हैं; न बुरा, न प्रभावशाली।
अनन्या पांडे: ठीक लगी, नए अंदाज़ की कोशिश।
नीना गुप्ता: मजबूत सपोर्ट, बढ़िया प्रदर्शन।
जैकी श्रॉफ: ठीक ठाक; कहानी में संतुलित।
तकनीकी पहलू
बीजीएम / बैकग्राउंड म्यूजिक: कुछ जगह लाउड, थोड़ा डिस्टर्ब करता है।
संवाद: कभी-कभी सुनने में दिक्कत।
लोकेशन और सिनेमैटोग्राफी: अच्छी शूटिंग लोकेशन, विजुअल्स अच्छे हैं।
गाने: साधारण लेकिन कहानी के फ़्लो में फिट हैं।
देखें या न देखें
कहानी और पटकथा: साधारण और कमजोर।
सोशल मैसेज: युवा पीढ़ी के लिए आकर्षक।
कुल मिलाकर: औसत फिल्म; एक बार देखा जा सकता है।
फिल्म का टाइटल कहानी के अंत तक धीरे-धीरे अपना मतलब दर्शकों के सामने लाता है। सिर्फ सोशल मैसेज और कुछ अच्छे सीन्स के लिए देखें। ⭐⭐1/2 ~गोविन्द परिहार (26.12.25)

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